सत्यापित स्रोत कुल (Family): Menispermaceae Climber

गिलोय, गुडूची, अमृता (Tinospora cordifolia): फायदे, नुकसान, खुराक और रिसर्च

Giloy, scientifically known as Tinospora cordifolia, is a revered herb in Ayurveda, widely recognized for its immunomodulatory and adaptogenic properties.

Fact-checked & Programmatically Verified via NCBI PubMed अंतिम अपडेट: 14 Jul 2026
समीक्षक: Dr. Neeraj Kumar (BAMS)
गिलोय, गुडूची, अमृता (Tinospora cordifolia) plant leaf cover image
प्रमाण स्कोर: 90/100

त्वरित सारांश (Quick Facts & Highlights)

पौधे का प्रकार Climber
मुख्य लाभ प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन
सामान्य खुराक 1-3 ग्राम चूर्ण या 10-20 मिली रस का दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।
सुरक्षा चेतावनी गर्भावस्था को छोड़कर सामान्यतः सुरक्षित
ज्ञान स्रोत संकेतक (Evidence Sources):
वैज्ञानिक स्रोत: 2 (PubMed: 2, PubChem: 0) आयुर्वेदिक स्रोत: 1 (Texts: 1)

गिलोय, गुडूची, अमृता का वैज्ञानिक नाम क्या है?

गिलोय, गुडूची, अमृता का वानस्पतिक या वैज्ञानिक नाम Tinospora cordifolia है। यह पौधा वानस्पतिक रूप से Menispermaceae परिवार (Family) से संबंधित है। इसके अन्य स्थानीय या सामान्य नामों में Guduchi, Indian Tinospora, गिलोय, गुडूची, अमृता, गुडूची, अमृता, छिन्नरुहा शामिल हैं।

आयुर्वेदिक विवरण (Ayurvedic) (Classical Ayurvedic Properties)

भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ग्रंथ Charaka Samhita, Sushruta Samhita, Bhavaprakasha Nighantu के अनुसार पौधे के गुणधर्म:

रस (Rasa) कषाय (Bitter), तिक्त (Astringent)
गुण (Guna) लघु (Light), स्निग्ध (Oily)
वीर्य (Virya) उष्ण (Hot)
विपाक (Vipaka) कटु (Pungent)
दोष प्रभाव त्रिदोषहर (Balances all three doshas, especially Pitta and Kapha)
विशेष प्रभाव रसायन (Rejuvenating), ज्वरघ्न (Fever reducing), आमपाचक (Detoxifying), बल्य (Strengthening), वाजीकरण (Aphrodisiac)

मुख्य सक्रिय औषधीय घटक और फाइटोकेमिकल्स

पौधे के विभिन्न भागों में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल्स

Berberine
Alkaloid
सूक्ष्मजीव-रोधी, सूजन-रोधी, कैंसर-रोधी
Guggulsterone
Steroidal Saponin
शोथ-रोधी, प्रतिरक्षा-नियामक

रोग उपचार, प्रभाव और वैज्ञानिक प्रमाण

1 रोगों में उपयोगी
प्रमाण स्कोर: 90/100
यह बीमारी क्यों होती है और शरीर पर प्रभाव (Causes & Impact):

प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन' स्वयं में कोई विशिष्ट बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने या उसकी कार्यप्रणाली को संतुलित करने की आवश्यकता को दर्शाता है। यह स्थिति कई कारकों के कारण उत्पन्न हो सकती है जो प्रतिरक्षा को कमजोर करते हैं, जैसे बार-बार होने वाले संक्रमण (सर्दी, फ्लू), दीर्घकालिक तनाव और चिंता, खराब पोषण, अपर्याप्त नींद, अत्यधिक शराब या धूम्रपान, कुछ पुरानी बीमारियाँ (जैसे मधुमेह, ऑटोइम्यून स्थितियाँ), कैंसर उपचार (कीमोथेरेपी), और बढ़ती उम्र। इन कारकों के कारण शरीर की रक्षात्मक कोशिकाएं और तंत्र कमजोर हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति बाहरी रोगजनकों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण रोगी को कई शारीरिक नुकसान और लक्षण अनुभव हो सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख है संक्रमणों के प्रति बढ़ी हुई संवेदनशीलता, जैसे बार-बार सर्दी, खांसी, गले में खराश, बुखार और फ्लू। इसके अतिरिक्त, घावों का धीरे भरना, सामान्य थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी, पाचन संबंधी समस्याएं, एलर्जी प्रतिक्रियाओं का बढ़ना और पुरानी सूजन का विकास भी देखा जा सकता है। कुछ गंभीर मामलों में, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण गंभीर संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग या अन्य जटिल बीमारियाँ विकसित हो सकती हैं, जो जीवन की गुणवत्ता को काफी प्रभावित करती हैं।

पौधे का असर और ठीक करने का तरीक़ा (Plant Healing Action):

यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, संक्रमणों से लड़ने और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।

वैज्ञानिक क्रियाविधि (Scientific Action): Tinospora cordifolia exhibits immunomodulatory effects by stimulating the activity of macrophages, natural killer cells, and T-lymphocytes, leading to enhanced cellular and humoral immunity. Its polysaccharides and triterpenoids are key contributors to this effect.
संभावित सुधार का समय (Estimated Recovery Time):

गिलोय (गुडूची, अमृता) एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है जो अपने इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। इसका प्रभाव तत्काल नहीं होता, बल्कि यह शरीर में धीरे-धीरे प्रतिरक्षा प्रणाली को संतुलित और मजबूत करता है। प्रतिरक्षा कार्य में प्रारंभिक सुधार और संक्रमणों की आवृत्ति में कमी लगभग २-४ सप्ताह के नियमित उपयोग के बाद देखी जा सकती है। हालाँकि, प्रतिरक्षा प्रणाली को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करने और दीर्घकालिक लाभ प्राप्त करने के लिए आमतौर पर २-३ महीने या उससे अधिक समय तक लगातार सेवन की आवश्यकता होती है। गिलोय प्रतिरक्षा कोशिकाओं की गतिविधि को बढ़ावा देकर, सूजन को कम करके और एंटीऑक्सीडेंट सहायता प्रदान करके कार्य करता है। सर्वोत्तम परिणामों के लिए इसे एक स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार के साथ जोड़ना महत्वपूर्ण है।

सेवन मात्रा व अनुपान (Dosage & Adjuvant):

1-3 ग्राम चूर्ण या 10-20 मिली रस का दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।

प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन के लिए अन्य प्रमाणित औषधियां

नीचे उन अन्य औषधियों की सूची दी गई है जिनका उपयोग इस बीमारी में किया जाता है:

Psidium guajava (Psidium guajava)
Psidium guajava

Psidium guajava

Score: 92
नीम (Azadirachta indica)
नीम

Azadirachta indica

Score: 70
घृतकुमारी (Aloe vera (L.) Burm.f.)
घृतकुमारी

Aloe vera (L.) Burm.f.

Score: 60

संयोगात्मक फॉर्मूलेशन और पारस्परिक प्रभाव (Synergistic Combinations)

गिलोय को अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के साथ मिलाकर लेने से यह वात, पित्त और कफ तीनों को नियंत्रित करने में अधिक सक्षम हो जाती है। मुख्य संयोजन निम्नलिखित हैं:

1. गिलोय और अश्वगंधा (शारीरिक कमजोरी और तनाव नाशक)

गिलोय और अश्वगंधा का मिश्रण शरीर की पुरानी कमजोरी को दूर करने, धातुओं को पुष्ट करने और मानसिक तनाव को शांत करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यह एक उत्कृष्ट एडाप्टोजेनिक टॉनिक का काम करता है। इसके बल्य गुणों का वैज्ञानिक प्रमाण NCBI Study on Giloy & Ashwagandha Adaptogenic Synergy .

2. गिलोय और हल्दी (मधुमेह और सूजन नाशक)

गिलोय के काढ़े के साथ हल्दी का सेवन इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने और शरीर की आंतरिक सूजन को शांत करने में सहायक होता है। यह टाइप-2 डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है। इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन PubMed Research on Tinospora & Turmeric Activity .

फैक्ट-चेक

Moderate Evidence विश्वास स्तर: 70%
"गिलोय से डेंगू ठीक हो जाता है।"

वैज्ञानिक सच: गिलोय में एंटी-वायरल गुण हो सकते हैं जो डेंगू के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन यह अकेले डेंगू का इलाज नहीं है।

सत्यापितकर्ता: Admin Verified
लेखक के बारे में
Vikas Pal
Vikas Pal
औषधीय पौधों के शोधकर्ता एवं स्वास्थ्य लेखक

विकास पाल एक स्वतंत्र हर्बल शोधकर्ता एवं स्वास्थ्य सामग्री लेखक हैं, जिन्हें औषधीय पौधों और साक्ष्य-आधारित हर्बल चिकित्सा पर शोध करने का एक वर्ष से अधिक का अनुभव है। वे वैज्ञानिक शोध पत्रों, पारंपरिक हर्बल ज्ञान और विश्वसनीय स्रोतों, जैसे PubMed, WHO तथा अन्य प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों से प्राप्त जानकारी का अध्ययन करके सरल, सटीक और प्रमाण-आधारित सामग्री तैयार करते हैं। उनका उद्देश्य लोगों तक औषधीय पौधों से संबंधित विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना और उनके लाभ, सुरक्षा, पारंपरिक उपयोग तथा उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को आसान भाषा में प्रस्तुत करना है।

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